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Friday, May 4, 2018

एथलीट विजय सिंह चौहान

जैतपुर कलां बाह आगरा के एथलीट विजय सिंह चौहान !!!

विजय सिंह चौहान एक उत्कृष्ट ऑल राउंड एथलीट थे जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से देश के लिए कई पुरस्कार जीते। उन्होंने एशियाई खेलों और एशियाई चैम्पियनशिप में डेकैथलॉन में स्वर्ण पदक जीते और उन्हें 1973 में मनीला एशियाई चैम्पियनशिप में अपने शानदार प्रदर्शन के बाद 'आयरन मैन ऑफ एशिया' घोषित किया गया। उन्होंने सात मौकों पर राष्ट्रीय डेकैथलॉन रिकॉर्ड को फिर से लिखा। उनका रिकॉर्ड 7378 अंक था जो छह साल तक नहीं टुटा था।

विजय सिंह चौहान ने लक्ष्मीबाई नेशनल कॉलेज ऑफ फिजिकल एजुकेशन, ग्वालियर में करण सिंह के मार्गदर्शन में अपने एथलेटिक करियर की शुरुआत की। 400 मीटर से लेकर छोटे बाधाओं तक और लंबी कूद से लेकर जवेलिन थ्रो तक एथलेटिक स्वर्धाओं में वह बहुत अच्छे थे। उन्होंने उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की 1968 में इंटर यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप में 400 मीटर (47.3), 110 मीटर बाधा (15.9), लांग जंप (6.3 9 मीटर), और भाला थ्रो (204 फीट) में स्वर्ण पदक जीते। उन्हें 'सर्वश्रेष्ठ ऑल राउंड एथलीट' की उपाधि मिली। वह 1970 में कटक राष्ट्रीय चैंपियनशिप में एक उत्कृष्ट डिकैथलीट के रूप में उभरे। उन्होंने 1972 के राष्ट्रीय चैंपियनशिप में 7092 अंक का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया।

उनका पहला अंतर्राष्ट्रीय अनुभव उपयोगी नहीं था। 1970 में एडिनबर्ग राष्ट्रमंडल खेलों में भाग लेने के लिए चुने गए उन्हें मांसपेशियों को खींचने के कारण पहले दिन प्रतियोगिता छोड़नी पड़ी। इसके बाद उन्होंने 1971 में कुआलालंपुर में मलेशियाई एथलेटिक में हिस्सा लिया और 110 मीटर बाधाओं और डेकैथलॉन में शानदार प्रर्दशन कर दोहरा स्वर्ण पदक जीता।

विजय सिंह चौहान ने 1972 के म्यूनिख ओलंपिक खेलों में अच्छा प्रदर्शन किया। दुनिया के सर्वश्रेष्ठ के खिलाफ प्रतिस्पर्धा में उन्होंने 7378 अंकों के आंकड़े संकलित किए -ये अजेय रिकॉर्ड अभी भी उनके नाम पर है। 1973 में मनीला में एशियाई एथलेटिक चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक लिया तो उन्हें 'एशिया का आयरन मैन' भी घोषित किया गया था। फिर 1974 तेहरान एशियाई खेलों में उनके एथलेटिक करियर के सबसे महत्वपूर्ण क्षण आए। शानदार फॉर्म प्रदर्शित करते हुए उन्होंने लगभग म्यूनिख ओलंपियाड प्रदर्शन से मेल खाया और 7375 अंक के साथ स्वर्ण पदक जीता। इस प्रक्रिया में उन्होंने एक नया गेम रिकॉर्ड बनाया और जापान के अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी जूनिची ओनिज़ुका को 81 अंक से पराजित किया।

विजय सिंह चौहान ने कुछ दिन टाटा की टेल्को, जमशेदपुर की कार्य किया और फिर यूपी सरकार में खेल निदेशक के कार्यालय में शामिल हो गए जहां वह  संयुक्त निदेशक पद से रिटायर हुए। वह एक योग्य कोच भी रहे और उन्होंने हिंदी में खेलों पर कुछ किताबें लिखी हैं।

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Sunday, February 4, 2018

~ भदावर स्वाभिमान ~

राजा कृष्णसिंह ने भदौरा राज्य की गद्दी सँभालते ही राज्य के समस्त मुस्लमान सामँतोँ की सम्पत्ति जब्त कर उन्हें निकाल बाहर किया यह समाचार पाकर अकबर आग बबूला हो उठा, उसने 15000 चुनिँदा घुड़सवारोँ का सैन्य-दल भेजा परन्तु राजा कृष्णसिँह ने चबँल यमुना के बीहड़ी प्रदेश मेँ विकट व्यूह रचना कर छापा मार युद्ध किया, अकबर के बारह हजार घुड़सवार चबँल के भरकोँ मेँ मारे गये, शेष तीन हजार बच कर अकबर के पास पहुँचे तो उनका हाल देख अकबर अत्यँत क्रोधित हो उठा। अब अकबर ने अपने सबसे कुशल सेनापति मानसिंह को विशाल सेना के साथ भेजा पर वो सीधा आक्रमण करने की बजाये ग्वालियर में पड़ाव डाल और राजा कृष्णसिँह को मिलने के लिए सन्देश भेजा, कृष्णासिंह ने प्रत्युत्तर में मानसिंह को भिंड आने का निमंत्रण दिया। जिसे स्वीकार कर मानसिँह कुछ निजी अँगरछकोँ सहित भिण्ड पधारे और राजा कृष्णसिँह को स्नेहपूर्वक अपने साथ फतेहपुर सीकरी चलने के लिए तैयार कर लिया। दूसरे दिन दोनोँ राजा मय काफिले के फतेहपुर सीकरी पहुँचे। मानसिँह ने विशेष आवभगत कर कृष्ण सिँह को सुन्दर महल में ठहराया। अकबर ने साजिश रची थी और स्वयं अजमेर चला गया था, दूसरे दिन द्रुतगामी घुड़सवार दूत अकबर का सँदेश ले कर आया कि दछिण मेँ विद्रोह हो गया है और सेनापति को अभी विद्रोह दबाने के लिए प्रस्थान करना होगा। 


मानसिंह के प्रस्थान के बाद अकबर लौटा और राजा कृष्णसिँह को अन्य सेनानायकों ने सम्मान सहित दरबार मेँ उपस्थित किया राजा कृष्णसिँह ने दरबारी नियम कायदोँ की अवहेलना कर एक आसन पर बैठ गये। अकबर पहले ही जला भुना बैठा था और भी क्रोधित हो उठा पर अपने क्रोध को दबा बोला आपने तहजीब के मुताबिक व्यवहार क्योँ नहीँ किया तो राजा ने दो टूक जवाब दिया कि आप आगरा-दिल्ली के सम्राट हैँ और मैँ भिण्ड के भदौरिया राज्य का स्वतँत्र शासक हूँ। इसी भाव से आप को भी मेरा अभिवादन करना चाहिये राजा के इस उत्तर ने अकबर को झकझोर दिया उसने अपने सेनानायकों से कहा इस राजा को तुरन्त हाथी के पैरोँ तले कुचलवा दो, पर फिर अकबर ने विचार किया कि मानसिँह वापिस आने पर कहीँ नाराज न हो इसलिये राजा कृष्णसिँह को विचार करने का वक्त दिया की दरबारी तहजीब के अनुसार अभिवादन को तैयार हो जाते हैँ तो सँधिपत्र लेख कर सम्मान सहित मुक्त कर दिया जाये परन्तु राजा कृष्णसिँह किसी भी तरह अकबर को दरबारी तहजीब का अभिवादन (मुजरा) करने को तैयार नहीँ हुए, और उन्हें हाथी के पैरोँ तले कुचलवा दिया गया यह दर्दनाक वाकया अबुल फजल अपने ग्रँथ अकबरनामा के तृतीय खण्ड के 'हिन्दूरायरायान' अध्याय मेँ लिखा है कि भदौरिया राजा कृष्ण सिँह वीर पुरुष थे उन्होने प्राण दे कर भी अपना स्वाभिमान बचाये रखा। 
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Wednesday, January 3, 2018

नाई - पंडित - ठाकुर

पिनाहट बाजार में एक नाऊ दुकान धरें हतो, वाये ग्राहक सों मजाक करन में विशेष आनंद आत हतो। कोउ बार बनवाने- दाढ़ी छिलवाने बैठो नहीं के वाको मज़ाक शुरू - काये ! तुमाए गाल तौ लाल टिमाटर हेगये, भौजाई ने रात काट लऔ हतो ?  अब ग्राहक बेचारा बीच में उठकर जा भी नहीं सकता,  सो बेबसी में सहता और चुप रहता।

सबको पता है की नाई और पंडित की खूब छनती है व दोनो ही एक दूसरे की चालों को काट भी सकते हैं। एक दिन एक पंडितजी दाढी बनवाने आये पर नाई ने उनका पूरा सिर ही मूड़ दिया, पंडितजी बोले कि चलो रोज-रोज तेल लगाने से फ़ुरसत मिली, मगर जैसे ही पंडित उठने लगे नाई ने चाँद पर टोना मार दिया पंडितजी ने क्रोध को शांत किया और बोले कुछ नहीं और कुछ सोच कर एक अधन्नी अधिक उस नाई को मजूरी देदी, नाई ने पूंछा कि पंडितजी ज्यादा क्यों?  पंडितजी बोले के आज बहुत ही अच्छा मुहूरत है, जो भी तेरा टोना खायेगा, उसके तो राजकाज हो जायेंगे। नाई सोच में पड़ गया - ये तो बात ही उल्टी हो गयी, उसने चलते हुए पंडितजी से पूंछा कि, ऐसा समय कब आयेगा, जब मैं जिसके टोना मारूं और वो बरबाद हो जाये। पंडितजी ने भी अपने मन में नाई का अंत सोच लिया और बोले कि रविवार के दिन दोपहर को जिस भी आदमी के टोना मारोगे, वह उसी दिन से बरबाद हो जायेगा। 

नाई ने अपने मन में प्लान बना लिया, एक ठाकुर साहब उसे बहुत परेशान करते थे और नाइन भी ठकुराइन की मालिश करते-करते परेशान थी। नाई के मन में हिसाब बराबर करने की तमन्ना थी ही, सो वो रविवार के दिन ठाकुर साहब के घर पहुँच गया और ठाकुर साहब की खोपडी मूंडने के लिये उस्तरा तेज करने लगा, ठाकुर ने पूंछा रे आज उस्तरा इतना तेज क्यों कर रहा है, आज तो मै केवल दाढी ही बनवाऊंगा। उसने भी पंडित की तरह बता दिया कि आज जो भी चांद मुडवायेगा, वह राजपाट का अधिकारी होगा, उसने जल्दी से ठाकुर की चांद मूंड दी और एक टोना ठाकुर की खोपडी मे जड दिया। 

ठाकुर को बहुत बुरा लगा कि एक नाई ने उसकी चांद टोन्या दी, क्रोधवश पास में रखी तलवार उठाई और एक ही वार में नाई का सर उनके हाथ में था, पंडित की सीख के कारण नाई तो मारा ही गया और ठाकुर भी कोर्ट कचहरी के चक्कर लगा-लगा कर बरबाद हुआ।  तो अब बताओ महाभारत काल की पांडवो की हाट - पिनहट का बाजार का बाज़ार क्यो उजड़ा ;)
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Tuesday, January 2, 2018

बाह नगर पालिका परिषद

बाह नगर पालिका परिषद की आधिकारिक वेबसाइट ( http://nppbah.com) इंटरनेट से ऐसे गायब हुई है जैसे गधे के सिर से सींग !

इस वेबसाइट को 2013 में बनाया गया था, आज ये गायब कर दी गयी है!
इसका स्नेप शॉट आज Wayback Machine से निकला जिसपर लिखा गया था।
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यह वेबसाइट मुख्य रूप से बाह के निवासियों को विभिन्न उपयोगी सेवाएं प्रदान करने के लिए सामूहिक पहल है जो आगरा (यू.पी.) के भौगोलिक क्षेत्राधिकार में आती है और साथ ही साथ नगर पालिका परिषद बाह की यात्रा में रुचि रखने वाले सामान्य जनसाधारण को जानकारी प्रदान करती है।
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'डिजिटल इंडिया' का सपना बाह में विफल किया गया है कई तहसील डिजिटल सिस्टम को अपना कर ई-गवर्नेंस द्वारा सरकारी विभागों के कम्प्यूटरीकरण की पहल से प्रशासन के बेहतर नागरिक केन्द्रित सेवा और पारदर्शिता को सुनिश्चित कर चुके है। बाह में इसको बंद करने का कौन दोषी है ?

#digitalindia #egovernance Digital India @Gov.in @nicdeity @NSDLeGovernance Rani Pakshalika Singh @pakshalikasingh
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My Village History

आप के विचारो का स्वागत है .....!!!

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