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Showing posts with the label सामाजिक मुद्दे

कॅरोना लॉकडाउन

ये सामान्य समय नहीं है, मानव जाति वैश्विक संकट का सामना कर रही है, शायद हमारी पीढ़ी का सबसे बड़ा संकट ? अगले कुछ हफ्तों में लोगों और सरकारों ने जो निर्णय लिए हैं वे शायद आने वाले वर्षों के लिए दुनिया को आकार देंगे। वे न केवल हमारी स्वास्थ्य प्रणाली बल्कि हमारी अर्थव्यवस्था, राजनीति और संस्कृति को भी आकार देंगे। हमें जल्दी और निर्णायक रूप से कार्य करना होगा। हमें अपने कार्यों के दीर्घकालिक परिणामों को भी ध्यान में रखना चाहिए। विकल्पों के बीच चयन करते समय, हमें अपने आप से न केवल यह पूछना चाहिए कि तत्काल खतरे को कैसे दूर किया जाए, बल्कि यह भी कि तूफान के गुजरते ही हम किस तरह की दुनिया में बस जाएंगे। हां ! तूफान गुजर जाएगा, मानव जाति बच जाएगी, हम में से अधिकांश अभी भी जीवित होंगे - लेकिन हम एक अलग दुनिया में निवास करेंगे। कई अल्पकालिक आपातकालीन उपाय जीवन की स्थिरता बन जाएंगे। यह आपात स्थिति की प्रकृति है की वह  प्रक्रियाओं को तेजी से आगे बढ़ाते हैं। ऐसे निर्णय जो सामान्य समय में विचार-विमर्श के वर्षों में ले सकते हैं, कुछ ही घंटों में पारित हो जाते हैं। अपरिपक्व और यहां तक क...

पिनाहट : कब तक पुल से ढहोगे, बाढ़ में कब तक बहोगे..

भ दावर के बाशिंदे बरसो से , पिनाहट - घाट पर एक स्थिर पुल का सपना सँजोये हुए थे ,   इस सपने में रंग भरने के लिए 1989 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने , चंबल - नदी - पुल की नींव रखी तो भदावर बासियों को विकास की रौशनी की आशा थी , पर लगभग 25 साल बाद भी कोई कार्य नहीं हुआ है।   पिनाहट - पुल का निर्माण मध्य - प्रदेश , उत्तर - प्रदेश एवं केन्द्र - सरकार की साझा परियोजना है ,   कई बार पुल निर्माण केलिए सर्वेक्षण हो चुके है , लेकिन सेतु - निर्माण अधर में लटका रहा है। चंबल घाटी के वाशिंदे , पुल - निर्माण के सपने पूरे होने का इंतजार कर रहे हैं। मामले के तथ्यों को देखा जाये तो , क्षेत्र के लोगों के साथ धोखा किया गया हउन्हे हर चुनाव के समय " हवाई - पुल " परोसा जाता रहा है ।